रविवार, 2 सितंबर 2012

बचपन हमें बचाना होगा.



कविता
              बचपन हमें बचाना होगा.................


रूखा बचपन सूखा बचपन,देखो कितना भूंखा बचपन,
गाँव देश जन-जन के मन में,नई क्रांति लाना होगा.
              बचपन हमें बचाना होगा.

कल-कारखाने जाते बच्चे,ढेरों बोझ उठाते बच्चे,
अपनी इस मेंहनत के बदले,एक अठन्नी पाते बच्चे.
सोचो तो ये दिल रोता है,आठ आनें में क्या होता है.
यह भूंखा बचपन भी आख़िर,जानें कितने गम ढोता है.

हर गम हमको पीना इनका,जहाँ गिरे पसीना इनका,
               समझो खून बहाना होगा.
               बचपन हमें बचाना होगा

इनमें जो नादान छिपा है,समझो वो भगवान छिपा है.
इनके अल्लड़पन के अंदर,एक अनोखा ज्ञान छिपा है.
इनका बचपन अगर खिला है,तो समझो सर्वस्व मिला है.
कर्णधार हैं ये भारत के प्रगती की आधारशिला है.

सारा खर्चा हमें वहन कर एक फटी पतलून पहन कर,
                सुंदर फूल खिलाना होगा.
                बचपन हमें बचाना होगा

घर के चंदा-मामा हैं ये,बुश,बराक ओबामा हैं ये.
ये नानक हैं,पैगंबर हैं,कल के कृष्ण-सुदामा हैं ये.
स्कूलों में जाएँ कैसे,पुस्तक को अपनाएँ कैसे,
पग-पग पर होते शोषण से,सोचो मुक्ति पाएँ कैसे.

चेहरे के भावों को पढ़कर,हमको इस मिट्टी को गढ़कर,
                   सुंदर मूर्ति बनाना होगा.
                   बचपन हमें बचाना होगा.
                                         जय सिंह "गगन"

1 टिप्पणी:

  1. घर के चंदा-मामा हैं ये,बुश,बराक ओबामा हैं ये.
    ये नानक हैं,पैगंबर हैं,कल के कृष्ण-सुदामा हैं ये.
    स्कूलों में जाएँ कैसे,पुस्तक को अपनाएँ कैसे,
    पग-पग पर होते शोषण से,सोचो मुक्ति पाएँ कैसे.

    चेहरे के भावों को पढ़कर,हमको इस मिट्टी को गढ़कर,
    सुंदर मूर्ति बनाना होगा.
    बचपन हमें बचाना होगा....GREAT LINE...Jay....SALUTE....THNX...Atul...Once Again..

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